प्रातःकाल की भांति सायंकाल भी सन्ध्या वन्दन भगवदाराधन आदि कृत्य विधिवत् करने चाहियें। एक ही प्रहर के अन्दर दो बार भोजन नहीं करना चाहिए, ऐसी शास्त्राज्ञा है यथा—

याममध्ये न भोक्तव्यम्।

आयुर्वेद शास्त्र में एक बार खाकर उसके जीर्ण होने से पूर्व पुनः पुनः खाने से 'अध्यशन' रोग की उत्पत्ति बतलाई है।

सायंकाल चार काम न करे:—

चत्वारि खलु कार्य्याणि सन्ध्याकाले विवर्जयेत्।
आहारं मैथुनं निद्रां स्वाध्यायञ्च चतुर्थकम्॥
(मनुसंहिता)

अर्थात्—सन्ध्याकाल में भोजन, स्त्रीसंग, नींद और वेद पाठ ये चार काम नहीं करने चाहिए।