श्री वैष्णव तुलसी शङ्ख और कमलाक्ष की माला, शैव रुद्राक्ष और भद्राक्ष की माला, गाणपत्य हरिद्रा की, अमुक मन्त्र के जाप में जीयापोता या विद्रुम=मूंगे की और मारण आदि आभिचारिक कृत्यों में सर्पास्थि तक की मालाओं का विधान शास्त्र में विद्यमान है।
शास्त्रीय-स्वरूप
पद्माक्षैर्विहिता माला शत्रूणां नाशिनी मता।
कुशग्रन्थिमयी माला, सर्वपापप्रणाशिनी॥१॥
पुत्रजीवफलैः क्लृप्ता कुरुते पुत्रसम्पदम्।
प्रवालैर्विहिता माला प्रयच्छेत्पुष्कलं धनम्॥२॥
(तन्त्रसार)
अर्थात्—कमलाक्ष की माला शत्रु नाश करती है, कुश ग्रंथि से बनी पाप दूर करती है। जीयपोते के फल की पुत्र और सन्तान देती है। प्रवाल 'मूंगे' की माला धन देती है।
पूर्व कथनानुसार अंगुष्ठ मध्यांगुली के संघर्ष से जो विद्युत् उत्पन्न होगी, वह सात्विक, राजस, तामस किस प्रकार की अपेक्षित है इसी विचार तारतम्य से विभिन्न मालाओं की व्यवस्था है। यदि केवल भगवत् पुष्टि के लिए किंवा मुक्ति के लिये जाप हो रहा हो तो इसके लिए सात्विक विद्युत् उत्पादक तुलसी आदि की सात्विक द्रव्य निर्मित माला चाहिये। कदाचित् 'त्र्यम्बकं यजामहे' आदि आयुष्यवर्द्धक रजोगुणात्मक मन्त्र जपने की आवश्यकता है तो रुद्राक्ष उपयुक्त होगा। पुत्र प्राप्ति के लिए सन्तान गोपाल आदि मन्त्रों के जाप में 'जीया पोता' (जीव पुत्र) की माला। इसी प्रकार विघ्ननिवृत्त्यर्थ हरिद्रा की और मारण मन्त्रों में तामसी हड्डी आदि क्रूर पदार्थ से बनी ठीक रहेगी।
यह अनेकविध व्यवस्था इसलिये भी है कि साधक; अन्तरिक्ष में व्याप्त विद्युत् को अमुक २ शक्तियों में से यथेष्ट किसी को भी उद्वेलित कर उनसे मनचाही सिद्धि प्राप्त कर सके।
आज के वैज्ञानिकों ने केवल भौतिक विद्युत् के ही अढाई गुण अभी तक समझे हैं अर्थात्—बिजली से प्रकाश होता है, यन्त्र चलता है तथा किसी वस्तु को फैलाया जा सकता है-आदि, परन्तु हमारे महर्षियों ने विद्युत् शक्ति के विभिन्न ४९ स्वरूपों का पता लगाया था, जिन्हें हिन्दू शास्त्रों में ४९ मरुत् के नाम से स्मरण किया गया है। यह प्रसंग विस्तारपूर्वक हमने 'पुराण दिग्दर्शन' में प्रकट किया है।
कहना न होगा कि हमारे यहाँ केवल मन्त्र संख्या जानने मात्र के लिये ही माला की व्यवस्था नहीं है। कदाचित् ऐसा होता तो फिर तत्तत् कार्यों में विभिन्न मालाओं का विधान न होता, मालाओं का अनेकविध्य ही इस बात का प्रबल प्रमाण है, कि यह व्यवस्था सुतरां दार्शनिक एवं मनोवैज्ञानिक सिद्धान्त पर आधारित है।